फिल्म इंडस्ट्री में 28 साल लंबी पारी खेलने वाले ऐक्टर अपनी अगली फिल्म '' से एक नया माइलस्टोन स्थापित करने जा रहे हैं। दरअसल, इस फिल्म के साथ अजय फिल्मों की सेंचुरी पूरी कर लेंगे। हमने उनसे उनके फिल्मी सफर को लेकर खास बातचीत की : आपकी सौवीं फिल्म रिलीज को तैयार है। इतने लंबे अरसे में आपने सिनेमा के कई दौर देखे हैं। आप कितना बदलाव पाते हैं इंडस्ट्री में और आपको कौन सा दौर ज्यादा पसंद है?मुझे तो यह पता ही नहीं था कि यह मेरी सौवीं फिल्म है। फिल्म के दौरान ओम (डायरेक्टर ओम राउत) ने बताया कि ये आपकी सौवीं फिल्म है। मेरे लिए तो हर फिल्म उतनी ही स्पेशल होती है, सौ हो या एक, यह तो सिर्फ एक नंबर होता है, पर मैं खुश हूं कि सौ फिल्में पूरी हो गई हैं। बात करें, इंडस्ट्री में बदलाव की, तो अब सब कुछ बदल गया है, टेक्निकली काम का तरीका बदल गया है, बजट, अप्रोच, सोच बदल गई है, प्रफेशनलिजम बहुत आ गया है। ऐक्शन पहले से बहुत ज्यादा सेफ हो गया है। अब इतना रिस्क नहीं रह गया। पहले तो हर दूसरे दिन हमारी हड्डियां टूटती थीं। अब वह बंद हो गया है। लेकिन उस दौर में मजा बहुत आता था। तब मस्ती-मजाक चलता था। किसी पर इतना प्रेशर नहीं होता था। इतना मीडिया भी नहीं था। आप जो चाहें कर सकते थे। अब सब प्रेशर में ही काम करते हैं। पहले हम टेंशन नहीं लेते थे कि फिल्म का क्या होगा? रिलीज होगी, तब देखेंगे। अब सब शुरू से ही टेंशन में काम करते हैं कि ठीक कर रहे हैं या नहीं, चलेगी या नहीं चलेगी, तब हम 15-15 फिल्में एक साथ करते थे। क्यों लगा कि 'तानाजी' की कहानी लोगों को सुनाना जरूरी है? और इसमें क्या चुनौतियां रहीं?जब मैंने यह कहानी सुनी, तो लगा कि यह असली कहानी नहीं भी होती, तब भी इसमें इतना ज्यादा इमोशन, ड्रामा, हीरोइजम है कि यह बननी ही चाहिए। ऊपर से सोने पर सुहागा यह कि यह रियल कहानी है, तानाजी ने देश के लिए इतना बड़ा बलिदान दिया। इसलिए, हमने अनसंग वॉरियर सीरीज शुरू की है, क्योंकि ऐसे कितने वीर योद्धा हैं, जिन्होंने देश के लिए इतना कुछ किया, लेकिन उनको पूरा देश जानता ही नहीं है। जैसे तानाजी को महाराष्ट्र में लोग जानते हैं। हमारी किताब में उनके बारे में एक पैराग्राफ है, जो किसी को याद भी नहीं है। मुझे लगता है कि इतिहास की ये चीजें बाहर आनी चाहिए। इसलिए, हमने ये सीरीज शुरू की और तानाजी उसका पहला हिस्सा है। हालांकि, सोलहवीं सदी के दौर को आज क्रिएट करना आसान नहीं था, वैसी लोकेशंस अब नहीं हैं। फिर, उनके बारे में रेफरेंस भी कम हैं, तो काफी इमैजिन करना पड़ा। सुना है अनसंग वॉरियर सीरीज की अगली फिल्म आप राजा सुहेलदेव पर बनाने वाले हैं?नहीं, यह गलत खबर है। अभी हमने तय नहीं किया है। हमारे पास ऐसे काफी विषय हैं, जिस पर अभी प्लानिंग ही चल रही है। हमारे देश में ऐसे काफी हीरोज हैं, जिनके बारे में लोगों को पता चलना चाहिए। 'तानाजी' की कास्ट काफी इंट्रेस्टिंग है। इसमें आप सैफ और काजोल के साथ सालों बाद आ रहे हैं। को-ऐक्टर के रूप में उनमें क्या बदलाव पाया?जो सैफ का किरदार है, वह मुझे कुछ ऐसा ही चाहिए था, दुष्ट, मसखरा, जो लगे कि मर्द है, क्योंकि आपका विरोधी भी बहुत स्ट्रॉन्ग होना चाहिए, सैफ इसके लिए परफेक्ट है। इसलिए, हमारी पहली चॉइस वही थे। वहीं, काजल का करैक्टर बहुत लंबा नहीं है, पर बलिदान की बात करें, तो पत्नी और परिवार का बलिदान और बड़ा होता है। औरतों में इतनी हिम्मत होती है कि वे अपने पति को खुशी-खुशी भेजती हैं, ये जानते हुए भी कि शायद वह लौटकर न आए। इधर बेटे की शादी है और वह जंग पर जा रहा है, तो उस ड्रामा के लिए मंझी हुई और सेंसिबल ऐक्ट्रेस चाहिए थी, तो काजल से बेहतर कौन हो सकता है। बदलाव की बात करूं, तो काजल का तो पता नहीं चलता, क्योंकि वह रोज घर पर साथ ही रहती हैं, लेकिन सैफ पहले से बहुत ज्यादा डेडिकेटेड और मैच्योर हो गया है। 'तानाजी' के बाद आपकी अगली दो फिल्में 'भुज' और 'मैदान' भी पीरियड ड्रामा है। इन दिनों बैक टू बैक पीरियड फिल्में करने की क्या वजह है?वजह कोई नहीं है। ये दो-तीन ऐसी फिल्में एक साथ आ रही हैं। मुझे खुद भी यह अहसास ही नहीं हुआ कि ऐसी दो-तीन फिल्में एक साथ हो गईं। लेकिन इन फिल्मों की स्क्रिप्ट एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी है, तो मुझे खुशी है कि मैं वे फिल्में कर रहा हूं, लेकिन अब मैं इससे ब्रेक लेना चाहूंगा। लव रंजन और रणबीर कपूर के साथ वाली फिल्म का क्या हुआ?उस फिल्म की शूटिंग में अभी काफी टाइम है। यह फिल्म इस साल के आखिर तक शुरू होगी। आप भंसाली के साथ भी लंबे समय के बाद 'गंगूबाई काठियावाड़ी' करने जा रहे हैं?'गंगूबाई काठियावाड़ी' अभी तक कंफर्म नहीं है। हम अभी भी बातचीत कर रहे हैं।
from Entertainment News in Hindi, Latest Bollywood Movies News, मनोरंजन न्यूज़, बॉलीवुड मूवी न्यूज़ | Navbharat Times https://ift.tt/2SPcD3V
https://ift.tt/2FLzuri
No comments:
Post a Comment