Friday, August 9, 2019

Movie

की पिछली फिल्म 'अय्यारी' भले ही बॉक्स ऑफिस पर नाकाम रही, मगर आने वाली फिल्मों को लेकर वह बहुत एक्साइटेड हैं। इन दिनों 'जबरिया जोड़ी' से चर्चा में आए सिद्धार्थ जल्द ही 'मरजांवा' और '' में भी नजर आएंगेः सिद्धार्थ आपकी आनेवाली फिल्में बहुत दिलचस्प लग रही हैं? आप जब अदाकार होते हैं, तो नाम, पैसा, शोहरत तो आपको मिलती ही है। मगर फिर आपको एक क्रिएटिव पर्सन होने के नाते कुछ ऐसा काम करने की ख्वाहिश होती है, जो आपने किया न हो। अदाकार के रूप में यह कीड़ा तो है मुझमें। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मुझे अपने करियर में अलग-अलग तरह की स्क्रिप्ट्स मिली हैं। यह सच है कि कुछ चली हैं और कुछ नहीं, मगर यह भी सच है कि हर जेनरेशन में मेन लीड कलाकारों में मुश्किल से चुनिंदा ऐक्टर ही स्वीकारे जाते हैं और मैं खुद को लकी मानता हूं कि मैं उन ऐक्टर्स में हूं। ऐसा कोई भी सुपर स्टार नहीं रहा, जिसने जितनी फिल्में की हों, वे सब सुपर हिट रही हों। आजकल तो एक ही फ्राइडे में लोगों का करियर बन और बिगड़ रहा है। मैं अपनी आनेवाली फिल्मों के लाइन अप को लेकर काफी एक्साइटेड हूं। 'जबरिया जोड़ी' के बाद 'मारजांवा' और 'शेरशाह' जैसी फिल्में हैं। 'हंसी तो फंसी' के बाद परिणीति के साथ 'जबरिया जोड़ी' में काम करने का क्या फायदा हुआ?सबसे बड़ा फायदा तो यही होता है कि आपको आइस ब्रेक नहीं करनी पड़ती। आप एक फिल्म करते हैं, तो आपके बीच एक रेपो बन जाता है। परिणीति की सबसे अच्छी बात यह है कि वह इम्प्रोवाइजेशन करने से डरती नहीं है। हमारे बीच एक कंफर्ट जोन है और हम ऊटपटांग चीजें ट्राइ करने से घबराते नहीं हैं। वह पटना की पढ़ी-लिखी लड़की बनी हैं और मैं शहर का बाहुबली बना हूं, तो हमें अपने किरदारों में बहुत मजा आया। अगर कोई नई लड़की होती, तो किरदारों में स्मूदनेस लाने में वक्त लगता, मगर परिणीति के होने से बहुत-सी चीजें आसान हो गईं। 'मरजांवा' में आपके किरदार में क्या खास है?यह एक लार्जर देन लाइफ फिल्म होगी। इसमें रितेश देशमुख, तारा सुतारिया, रवि किशन, नासिर सर जैसे कई कलाकार हैं। यह एक ऐक्शन ऑरिएंटेड फिल्म है, मगर डार्क नहीं है। इसमें कमाल की डायलॉगबाजी होगी। सुना है कि अपनी अगली फिल्म 'शेरशाह' के लिए आप कैप्टन बत्रा के माता-पिता से मिले, जिन पर यह फिल्म आधारित है?मैंने जब उनके पैरंट्स से बात की, तो मैं बहुत जज्बाती हो गया था। जाहिर है वह मात्र 24 साल की उम्र में शहीद हुए थे। उनसे मिलने के बाद एक डर और दबाव भी महसूस हुआ कि अगर मैं उनके बेटे को उनकी उम्मीदों के मुताबिक जी नहीं पाया तो? मैं उनसे कई बार मिला हूं और मुझे लगता है कि अगर मैं उनके बेटे को उनके अनुसार जी पाया, तो अभिनेता के रूप में यह मेरी जीत होगी। 'शेरशाह' के लिए मैंने अपना वजन काफी कम किया है। फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी है। 'शेरशाह' करगिल युद्ध में शहीद हुए कैप्टन विक्रम बत्रा से प्रेरित है और उनकी जांबाजी के कारण ही उन्हें शेरशाह खिताब दिया गया था। आपने अपनी पास्ट रिलेशनशिप से क्या सीखा?यही कि परस्पर एक-दूसरे का सम्मान करना जरूरी है। अगर रिलेशनशिप में रहे दो लोगों में से कोई एक उस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाना चाहता, तो आप उसे जबरदस्ती रोक नहीं सकते। आपको उसे जाने देना पड़ेगा। फिलहाल मैं अपने काम पर ज्यादा फोकस कर रहा हूं और इन चीजों के बारे में नहीं सोच रहा। जब कड़ी मेहनत के बावजूद फिल्में नहीं चलतीं, जैसे 'अय्यारी', तो उसे आप कैसे हैंडल कर पाते हैं? डिप्रेशन होता है? कुछ फिल्मों के बाद आपको लोहे का बन जाना पड़ता है। फिल्मों के फ्लॉप होने पर जब लोग, इंडस्ट्री और यूनिवर्स आपका इम्तिहान लेता है, तो आप नाकामी का रोना रोकर उस वक्त को बर्बाद करें या उसका विश्लेषण करने बैठ जाएं। उस वक्त आपको ये भी सोचना होगा कि फिल्ममेकिंग टीम एफर्ट है। मगर हमारे हिंदुस्तान में जब फिल्म चलती है, तब भी क्रेडिट ऐक्टर्स को ही मिलता है और नाकाम होने का दोष भी उन्हीं के सिर आता है। लेकिन कई बार ऐक्टर नहीं, बल्कि टीम फेल होती है। इस क्षेत्र की अनिश्चितता को स्वीकार करना होगा। हिट का कोई फॉर्मूला नहीं होता। मैं डिप्रेस होने वालों में से नहीं हूं। मेरी पर्सनैलिटी ऐसी नहीं है कि मैं डिप्रेस हो जाऊं। सच कहूं तो मैं अपना गुस्सा और फ्रस्ट्रेशन गेम खेलकर निकाल देता हूं। निराशा मुझे रोने पर मजबूर नहीं करती। बचपन में जब मैं किसी स्पोर्ट्स में हारता था, तो अग्रेसिव हो जाता था। आज अगर एक अदाकार के रूप में मुझमें आग बाकी है, तो मेरी फ्लॉप फिल्मों के कारण है।


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