Thursday, November 28, 2019

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Movie

साल 2018 में रिलीज हुई की सुपरहिट फिल्म '' में सौरभ शुक्ला की मां के किरदार में दिखीं का मंगलवार को निधन हो गया। वह 85 साल की थीं और फिल्म में उनके किरदार को काफी पसंद किया गया था। फिल्म 'रेड' के डायरेक्टर राजकुमार गुप्ता ने पुष्पा जोशी के निधन की सूचना सोशल मीडिया पर दी है। गुप्ता ने अफने पोस्ट में लिखा, 'पुष्पा जोशी जी के निधन की खबर सुनकर बेहद दुखी हूं। मेरे डायरेक्शन करियर में 'रेड' में आपको ऐक्टिंग करते देखना एक प्रमुख घटना थी। आप सेट पर और उसके बाहर काफी जीवंत थीं। आप जहां भी हैं आप मुस्कुरा रही होंगी और खुशियां फैला रही होंगी। हम आपको मिस करेंगे।' कास्टिंग डायरेक्टर शिखा प्रदीप ने भी पुष्पा जोशी के निधन पर एक पोस्ट लिखी। उन्होंने लिखा, 'हिंदी सिनेमा में सबसे ज्यादा उम्र में डेब्यू करने वाली जिन्होंने 85 वर्ष की उम्र पर फिल्म 'रेड' से ऐक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। इसके अलावा मुझे उन्हें फेवीक्विक के विज्ञापन में कास्ट करने का मौका मिला जिससे वह के तौर पर मशहूर हुईं। उनके अलग-अलग किरदारों को लोगों का भरपूर प्यार मिला। उन्होंने 26 नवंबर को आखिरी सांस ली। हमने पुष्पा जी के तौर पर एक चमकता सितारा खो दिया।' पुष्पा जोशी का फिल्म 'रेड' में किरदार काफी पसंद किया गया था। इसके बाद फेवीक्विक के विज्ञापन में आने के बाद उनकी तस्वीरों पर काफी मीम्स भी बनने लगे थे। फिल्म के सेट पर भी पुष्पा जोशी अजय देवगन सहित फिल्म की पूरी यूनिट की फेवरिट थीं।


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Movie

पणजी: गोवा के पणजी में आयोजित भारत के 50 वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पहली बार बच्चों की फिल्मों के लिए एक खास खंड बनाया गया। एंटरटेनमेंट सोसायटी ऑफ गोवा द्वारा आयोजित चिल्ड्रन फिल्म विलेज, बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। 20 नवंबर से 28 नवंबर, 9 दिनों तक चलने वाले इस समारोह में बच्चों को उनकी मनपसंद फिल्में दिखाने के लिए हवा से फुलाकर डिजटल मोबाइल थिअटर बनाए गए। चिल्ड्रन फिल्म विलेज का उद्घाटन गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने किया था। बच्चों के लिए बनाए गए इस खास खंड बॉलिवुड की कई नामचीन हस्तियों ने भी हिस्सा लिया और पिक्चर टाइम की इस संकल्पना की तारीफ की। अनिल कपूर, निर्देशक प्रियदर्शन, आदित्य धर, सतीश कौशिक और राहुल रवैल जैसे प्रख्यात फिल्म निर्माता ने फिल्म फेस्टिवल में आयोजित बच्चों के अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अभिनेता सतीश कौशिक की फिल्म 'स्कूल चलेगा' भी पिक्चर टाइम थिअटर में दिखाई गई। फिल्म के बाद सतीश कौशिक ने थिअटर की बड़ी स्क्रीन पर लाइव चैट के द्वारा दर्शकों से बातचीत की। उनकी इस फिल्म को दर्शकों ने खूब सराहा और कुछ मजेदार सवाल भी पूछे। '', 'चुस्किट', '' और 'पहुना' जैसी कुछ शानदार फिल्में पिक्चर टाइम डिजिप्लेक्स में दिखाई गईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया और सभी शो हाउसफुल रहे।


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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में हुए 26/11 के आतंकवादी हमले पर बनी फिल्म ‘’ रिलीज हो गई है। फिल्म में डायरेक्टर एंथनी मारस ने पाकिस्तानी आतकंवादी आमिर के कबूलनामे के वास्तविक फुटेज का इस्तेमाल किया है। फिल्म में मुंबई के ताज होटल पर हुए हमले को दिखाया गया है कि हमले के दौरान होटल के स्टाफ ने किस बहादुरी से भीतर मौजूद लोगों को बचाने का प्रयास किया था। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मारस को जानकारी, इंटरव्यू और कसाब के कबूलनामे के वास्तविक फुटेज दिए। कोर्ट में पेश किए गए टेप भी मारस और उनके सह-लेखक जॉन कोली को उपलब्ध कराए गए थे। मारस ने कहा, ‘हमने कसाब के मुकदमे के हजारों पन्नों को देखा, जिसमें गवाहों के बयान और आतंकवादियों व उनके हैंडलरों के बीच हुई सैटलाइट फोन पर बातचीत के टेप शामिल थे। हमने आगे की जानकारी के लिए कसाब के वकील का इंटरव्यू भी किया।’ उन्होंने कहा, ‘हम एक महीने से भी अधिक समय तक ताज में रुके, स्टाफ के लोगों का इंटरव्यू किया और उसी कॉरिडोर, किचन में गए जहां फिल्म में हुई घटनाएं घटित हुई थीं।’ इस फिल्म में अनुपम खेर, देव पटेल और आर्मी हैमर मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।


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Chunky Panday's niece and Ananya Panday's cousin Alanna Panday is yet to make her Bollywood debut but the young diva has already become a sensation on the internet. With several fans on Instagram itself, Alanna is quite popular and she makes sure that she keeps her fans updated by sharing pictures of herself.

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अर्जुन कपूर की पिछली फिल्म 'नमस्ते इंग्लैंड' बॉक्स ऑफिस पर भले न चली हो, मगर अपनी आगामी फिल्म पानीपत से उनकी आशाएं कम नहीं हैं। इस मुलाकात में वह अपने लुक्स पर बनने वाले मीम्स, फिल्म, किरदार, नाकामी, अपनी मां और बहनों के बारे में बात कर रहे हैं: पानीपत के सदाशिव राव भाऊ के किरदार के लिए सिर मुंडवाने में कहीं कोई हिचक थी? (हंसते हुए) मैंने आशु सर (निर्देशक आशुतोष गोवारीकर) से पूछा था कि क्या मैं गंजा होकर अच्छा लगूंगा? उन्होंने कहा, 'मैं कन्विंस्ड हूं, तुझे आश्वस्त करने के लिए एक लुक टेस्ट रखते हैं।' जाहिर सी बात है कि पेशवा तो चोटी के साथ का ही लुक रखते हैं। उन्होंने मेरा लुक टेस्ट करवाया और मुझे बताया कि मेरे सिर का शेप सही लग रहा है। उनका कहना था, 'तू पेशवा लग रहा है। पेशवा गंजे होने के साथ लंबे-चौड़े भी होते थे और तेरा बॉडी स्ट्रक्चर पेशवा की तरह ही है। मुझे लगा, जब निर्देशक इतना आश्वस्त है, तो मुझे यकीन करना ही होगा। बाल मुंडवाते हुए मुझे झिझक से ज्यादा चिंता थी कि मैं कैसा लगूंगा। मुझे 6-8 महीने टोपी पहनकर घूमना पड़ा था और वो मैंने मैनेज कर लिया। अब जब मैंने खुद को बड़े परदे पर देखा, तो लगा कि मेरा बाल मुंडवाना सही साबित हुआ। मगर आपके पेशवा सदाशिव राव भाऊ के लुक पर जो मीम्स बन रहे हैं, उसके बारे में क्या कहेंगे? सच कहूं, तो मैं हर चीज पर स्माइल करता हूं। मैंने अपनी जिंदगी में इतनी बड़ी-बड़ी चीजें देखी हैं कि मैं इनको हंसी-मजाक में टाल देता हूं। मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि जो भी मस्ती-मजाक करना चाहे, उन्हें यह सोचना होगा कि यह वास्तविक लोगों की कहानी है। ये लोग हमारे देश के लिए शहीद हुए थे। आप शहीद भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के बारे में कभी मीम्स नहीं बनाओगे। आप उनकी पगड़ी का मजाक नहीं उड़ाओगे, क्योंकि वह सम्मान का प्रतीक हैं। आप ये भूल जाओ कि दो साल पहले इसी लुक पर कोई फिल्म (बाजीराव मस्तानी) आई थी, जो पेशवाओं और मराठाओं पर बनी थी। आपके दिमाग में हंसी-मजाक जरूर होगा, मगर आप उनका अपमान नहीं कर सकते, जिन्होंने आपके देश के लिए जान दी थी। हम सब यंग हैं, एक-दूसरे की टांग खींचते हैं। मैं खुद रोस्ट कर चुका हूं, मगर एक हद पर आपको सोचना पड़ता है कि अपने मजाक से आप किसी को ठेस तो नहीं पहुंचा रहे। आप अर्जुन कपूर को ट्रोल नहीं कर रहे बल्कि इतिहास के उन जांबाजों पर मीम्स बना रहे हैं, जो देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने से पीछे नहीं रहे। मगर आप हैं कि सोशल मीडिया पर लगे पड़े हैं। आपको नहीं लगता कि ऐतिहासिक किरदारों का दौर चल पड़ा है। आपकी फिल्म पानीपत के आस-पास ही तानाजी भी रिलीज हो रही है। इससे पहले बाजीराव मस्तानी, मणिकर्णिका, पद्मावती, मोहनजोदारो जैसी कई फिल्में रिलीज होती रही हैं। पहले तो फिल्मकार ऐतिहासिक विषयों को छूने से डरते थे। बिलकुल। उन्हें लगता था कि इतिहास की फिल्म होने के नाते बजट्स भव्य होंगे। एक खास लुक के लिए ऐक्टर को बांधे भी रखना होता है। उनके सामने पहले ये चुनौती भी होती थी कि कौन-सा ऐक्टर एक साल तक बाल निकाल कर गंजा होने को तैयार होगा। असल में पहले इतना अनुशासन भी नहीं था। आज ऐतिहासिक फिल्मों के नजरिए से स्पेशल इफेक्ट्स और वीएफएक्स ने भी काफी तरक्की कर ली है। अब मैंने पिछले साल बाल मुंडवाए थे और मुझे तकरीबन एक साल हो गया है गंजा हुए। और फिर सच कहूं, तो इतिहास आज ज्यादा जरूरी भी हो गया है। हमें आज के युवाओं को याद दिलाने की जरूरत है कि कैसे इस देश के जांबाजों ने अपने बलिदान से समय-समय पर देश की रक्षा की है। आप इसे वॉर फिल्म की तरह देखें, मगर मैं कहूंगा कि ये एक देशभक्ति से परिपूर्ण फिल्म है। ये जो लोग हैं, इन्होंने हिंदुस्तान की सबसे बड़ी जंग लड़ी थी, ताकि आक्रमणकारी हमारे देश में घुसपैठ न कर पाएं। आज भी इतिहास इसलिए दोहराना जरूरी है कि आज भी लोगों की निगाहें इंडिया पर लगीं रहती हैं। आपने हाल ही में अपनी मॉम के नाम का एक खत सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। आपकी स्वर्गवासी मां आपके लिए किस तरह के सपॉर्ट सिस्टम का काम करती हैं? उस दिन नई फिल्म की शुरुआत हो रही थी। एक फिल्म खत्म होने जा रही थी। बहुत याद आ रही थी मॉम की। सोचा घर जाकर बताऊं। पहले नई फिल्म का खूब ढिंढोरा पीटता था, मगर एक पॉइंट के बाद आप घर जाकर ही बात करना चाहते हैं। घर आने पर मॉम के बगैर अधूरापन लगता है। मैं उस अधूरेपन को भर नहीं पाता। किसी ने पूछा कि आप अकेले हो इसलिए अधूरापन लगता है। मैंने कहा, 'नहीं मेरे साथ कई लोग हैं, मगर मॉम की जगह कौन ले सकता है। मेरी मां ऐसी थीं कि आस-पास होंगी भी न, तो यही चाहेंगी कि मैं अपने कदम खुद आगे बढ़ाऊं। वह मेरे साथ हैं। कुछ बुरा नहीं होने देंगी। मुझ जैसे कितने लोग होंगे, जिन्होंने अपनों को खोया है तो वे कहीं न कहीं इस बात पर अपनी निगेटिविटी को हटाकर मुझसे कनेक्ट करेंगे। और नाकामी को कैसे हैंडल करते हैं? आपकी पिछली फिल्म नमस्ते लंदन बुरी तरह से फ्लॉप रही। बहुत ईमानदारी से कहूंगा कि मैंने जिंदगी में जितना कुछ देखा है, उसमें एक अच्छा फ्राइडे और एक बुरा फ्राइडे कुछ मायने नहीं रखता, तो मुझे कोई हिला नहीं पाएगा। फिल्म फ्लॉप होती है, तो अफसोस होता है, बुरा लगता है, दिल टूटता है, मगर मैं हिलनेवालों में से नहीं हूं। मुझे फर्क पड़ता है, इमोशनल हूं, मगर इतनी ताकत किसी में नहीं कि कोई मुझे तोड़ पाए। मैं अपनी मां का बेटा हूं। अब आप अपनी बहनों (अंशुला, जाह्नवी,खुशी) के प्रति ज्यादा प्रोटेक्टिव और जिम्मेदार हो गए हैं। मैं शुरू से जिम्मेदार रहा हूं। मेरा व्यक्तित्व भी वैसा ही है। मैं सोचता भी ज्यादा हूं। आज भी मेरी टेंशन मेरी बहनों को लेकर ही चलती है। अब जैसे आज अंशुला की तबीयत ठीक नहीं है, तो मेरा सारा जेहन उसकी तरफ लगा हुआ है। अब सोने पर सुहागा की तरह मुझे जाह्नवी और खुशी का ख्याल भी रखना होता है। एक अरसे से आपकी प्रफेशनल लाइफ के बजाय पर्सनल लाइफ ज्यादा चर्चा में रही है? मेरे काम के बारे में भी बात होती रही है। उसका भी समय आया था और आगे भी आएगा। अब मेरी पर्सनल लाइफ के बारे में बात करते लोगों का मैं मुंह बंद नहीं कर सकता। मैं उन बातों से उत्तेजित नहीं होता बल्कि रिलैक्स रहता हूं। जब जिस चीज का वक्त आएगा, वह चीज हो जाएगी।


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